आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि यदि आप मुझे अपने बहुमूल्य वोट से अध्यक्ष चुनते हैं तो मैं अध्यक्ष के रूप में कार्य न करके एक प्रधान सेवक के रूप में कार्य करूंगा।
आजीवन सदस्यों की सहमति से "श्री भृगुवंशी ब्राह्मण मंदिर एवं धर्मशाला प्रबंध समिति" के संविधान को इतना मजबूत बनाया जाएगा कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या अध्यक्ष संस्था पर अपना अधिपत्य जमाने की बात तो बहुत दूर की है सोच भी न सकता।
⭐ केंद्रित संविधान (Bylaws)
संस्था में आजीवन सदस्य को सर्वोच्च शक्तियां उपलब्ध रहेंगी
धारा 1 : संस्था की सर्वोच्च इकाई
1.1 सर्वोच्च अधिकार: आजीवन सदस्य के पास सर्वोच्च अधिकार रहेंगे।
संस्था का अध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारी इस आजीवन सदस्य समिति के अधीन कार्य करेंगे।
अध्यक्ष या उनकी कार्यकारिणी अपनी मनमानी से "आजीवन सदस्यों" के निर्णय को बदल नहीं सकेंगे।
धारा 2 : आजीवन सदस्य
2.1 आजीवन सदस्यता
जो व्यक्ति संस्था द्वारा निर्धारित राशि/प्रक्रिया के अनुसार आजीवन सदस्यता ले ले, वह आजीवन सदस्य समिति का सदस्य होगा।
आजीवन सदस्यता एक बार ली जाएगी जोकि स्थायी होगी।
2.2 आजीवन सदस्यों के अधिकार
1. संस्था के किसी भी निर्णय को मंजूरी/अस्वीकृति देने का अधिकार।
2. बजट व लेखा रिपोर्ट को पास/रिजेक्ट करने का अधिकार।
3. आजीवन सदस्यों की नियुक्ति, निलंबन या हटाने का अधिकार।
4. संस्था के संविधान में परिवर्तन का अधिकार।
5. संस्था की कोई भी नीति–निर्णय 75% आजीवन सदस्यों की स्वीकृति के अनुमोदन पर ही अध्यक्ष लागू कर सकेगा।
धारा 3 : संस्था का अध्यक्ष और पदाधिकारी (मुख्य कार्यकारिणी)
3.1 अध्यक्ष की स्थिति
अध्यक्ष संस्था का संचालन प्रमुख होगा, परंतु निर्णय लेने वाला सर्वोच्च व्यक्ति नहीं।
अध्यक्ष पूर्णतः आजीवन सदस्य के अधीन कार्य करेगा।
अध्यक्ष कार्यों को करने का केवल प्रबंधकर्ता रहेगा।
उप–समितियों का गठन व विघटन का अधिकार रहेगा।
संस्था की कोई भी नीति–निर्णय 75% आजीवन सदस्यों की स्वीकृति के अनुमोदन पर ही अध्यक्ष लागू कर सकेगा।
3.2 पदाधिकारियों की नियुक्ति
अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष सहित सभी पदाधिकारी आजीवन सदस्यों द्वारा चुने जाएंगे।
इनका कार्यकाल 3 वर्ष रहेगा।
3.3 पद से हटाने का अधिकार
पद से हटाने का अधिकार
यदि किसी पदाधिकारी का कार्य संतोषजनक नहीं है तो 20 आजीवन सदस्यों के प्रस्ताव पर आजीवन सदस्यों के 75% बहुमत के अनुमोदन पर उस पदाधिकारी को मुख्य कार्यकारिणी द्वारा तत्काल हटाया जा सकता है।
धारा 4 : वित्त एवं पारदर्शिता
आजीवन सदस्यों के लिए वेबसाइट पर प्रत्येक दिन का हिसाब मय रसीद, बिल के संस्था की वेबसाइट पर उपलब्ध रखना।
हर 3 महीने में संस्था का पूरा हिसाब आजीवन सदस्यों को व्हाट्सऐप पर PDF FILE के माध्यम से भेजना।
कोई भी बड़ा भुगतान/खर्च (50,000/- से अधिक) आजीवन सदस्य की मंजूरी से ही होगा।
धारा 5 : आमसभा (General Body)
आमसभा सिर्फ कार्यक्रमों की जानकारी देने और कार्यक्रमों के लिए होगी।
धारा 6 : बदलाव व संशोधन
संस्था के संविधान में कोई भी परिवर्तन 75% आजीवन सदस्यों की मंजूरी के अनुमोदन पर ही मुख्य कार्यकारिणी द्वारा संभव होगा।
धारा 7 : वेबसाइट अनिवार्यता एवं डिजिटल पारदर्शिता
7.1 वेबसाइट की अनिवार्यता
चूँकि आजीवन सदस्यों का सहमति/असहमति के लिए शुक्रताल बार-बार आना संभव नहीं होगा इसलिए वेबसाइट पर यह सुविधा प्रदान की जाएगी जिसमें अध्यक्ष अपने प्रस्ताव को वेबसाइट पर अपलोड करेगा और sms द्वारा आजीवन सदस्यों को सूचित करेगा।
आजीवन सदस्य अपने निर्णयों पर सहमति/असहमति ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
संस्था की वेबसाइट पर कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी रखा जायेगा। जिसमें सहमत/असहमत आजीवन सदस्यों की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी।
आजीवन सदस्यों के लिए प्रस्ताव या अन्य किसी भी विषय पर जानकारी लेने या कमेंट करने की सुविधा वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगी
वित्तीय हिसाब–किताब, बैठक विवरण, प्रस्ताव आदि वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगे।
पारदर्शिता की दृष्टि से सभी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ ऑनलाइन दिखाई जाएँगी।
7.2 वेबसाइट को बंद करने पर दायित्व
वेबसाइट संस्था की पारदर्शिता और आजीवन सदस्यों के अधिकारों का मूल आधार रहेगा अत:
यदि कोई अध्यक्ष अथवा पदाधिकारी वेबसाइट को बंद कराता है, निष्क्रिय करता है, या आजीवन सदस्यों की ऑनलाइन पहुँच रोकता है, तो यह संस्था के संविधान का उल्लंघन माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में कम से कम 20 आजीवन सदस्य लिखित रूप में शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं और संविधान के अनुसार उस पदाधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई (पद से हटाना / निलंबन / कानूनी रिपोर्ट आदि) आरंभ की जा सकेगी।
धारा 8 : उप समितियाँ
संस्था की योजनाओ को सफल बनाने के लिए अध्यक्ष द्वारा उपसमितियां गठित की जाएंगी जिनका मुख्य कार्यकारिणी में कोई दखल नहीं होगी।
⭐ विशेष नोट
संस्था के इस संविधान में
✔ “अध्यक्ष नहीं, आजीवन सदस्य supreme authority होंगे। ”
✔ “अध्यक्ष आजीवन सदस्य के आदेशों का पालन कर कार्य करेगा।